॥ चन्द्रचाराध्यायः · बृहत्संहिता अध्यायः ४ ॥

चन्द्रकला–शृंग यन्त्रम्

चन्द्र-कला, शृंग-दिक्, पूर्ति, विम्ब-लक्षण, विक्षेप — शुद्ध सूर्यसिद्धान्त।

यन्त्र बन रहा है…