अध्याय १ → २ · शुद्ध सूर्यसिद्धान्त · बीज = ०
एक-एक कण। पहले इकाई, फिर युग, फिर भगण, फिर अहर्गण, फिर मध्यम, फिर मन्दफल। श्लोक यहाँ गढ़ा नहीं — सूत्र वही हैं जिनसे यह इंजन चलता है। गणक — दिवससङ्ख्या और बड़ी गणना।