तन्त्रकुल · सूर्यसिद्धान्त पञ्चाङ्ग

बेञ्जवाल-दृग्बीज — शोध-पत्र

कैसे निकली बेञ्जवाल-दृग्बीज सारणी · तीन परतें · फिट · सीमाएँ · दोनों सारणियों के साथ तुलना।

संस्कृतम्दृक्तुलनामूल सारणीबेञ्जवाल-दृग्बीज

१. प्रयोजन

मूल सारणी बर्जेस सूर्यसिद्धान्त ही है। बेञ्जवाल-दृग्बीज उसी पर अहर्गण के अनुपात में बीज और क्षेपक लगाती है ताकि लाहिरी-निरयण दृक् (Meeus सूर्य-चन्द्र, Schlyter ताराग्रह) निकट आए। मुख्य पञ्चाङ्ग मूल ही रहता है।

यह सूर्यसिद्धान्त का नया पाठ नहीं। नाम बेञ्जवाल-दृग्बीज इसलिए है कि बीज-संख्याएँ आचार्य राजेश बेञ्जवाल की हैं — जैसे बाद की बीज-सारणियाँ कर्ता के नाम से पहचानी जाती हैं। मूल ग्रन्थ बर्जेस-सूर्यसिद्धान्त है। केतकी/मकरन्द नहीं; फिट लाहिरी-Meeus, १८००–२११०।

२. तीन परतें — एक ही “बीज” नहीं

परतक्या हैक्या सुधारती हैक्या नहीं
क. रैखिक बीजमध्यम भ्रमण में अहर्गण-अनुपातशनि-गुरु का शताब्दिक खिसकावचन्द्र की मासिक लहरें
ख. आवर्ती फलevection + आनयन/वार्षिक/मन्दशेष; बुध S, 2S शीघ्रचन्द्र ~०.२°; बुध ~१.९°शुक्र, बुध अधःसंयोग
ग. अयनांशलाहिरी ~२४°केवल सायन दृक् → निरयण दृक्सूर्यसिद्धान्त स्फुट से नहीं घटता

३. मूल सूत्र

मध्यमदृग्बीज = मध्यममूल + ३६०° × बीज-भ्रमण × अहर्गण / १५७७९१७८२८ + क्षेपक
फिर अध्याय २ का मन्द-शीघ्र स्फुट। चन्द्र पर evection + आनयन sin(२D) + वार्षिक + मन्दशेष। बुध पर + S, 2S शीघ्र-ज्या।

अयनांश स्फुट से नहीं घटता। सूर्यसिद्धान्त स्वयं रेवती-निरयण है। क्षेपक कलि पर मध्यम को शून्य से हटाता है — दूसरी पंक्ति, छिपा अयनांश नहीं।

४. फिट कैसे निकला

उज्जयिनी, १५ अगस्त १२:०० IST, वर्ष १८००–२११० (दस-दस वर्ष)। प्रत्येक ग्रह पर अवशेष = चिह्नित(स्फुटमूल − दृक्) = a + b·अहर्गण। बीज-भ्रमण = −b × महायुग-दिन / ३६०। क्षेपक = −a। चन्द्र पर उसके बाद अवशेष से A sin(२D − M)। लिपि scripts/fit_drik_bija.py

अहर्गण ~१८७२८०२ (२०२६); खिड़की ३१० वर्ष। a और b अलग-अलग भौतिक नहीं — युग्म केवल १८००–२११० के अन्दर प्रक्षेप के लिए।

ग्रहबीज-भ्रमण (महायुग)क्षेपक °रैखिक ° / १००० वर्ष
सूर्य+२८.४६४७−११.५६+२.३७२
चन्द्र+२९.०४२४−१२.०५+२.४२०
मङ्गल+२१.२६२१−७.४८+१.७७२
बुध+४०.१७३७−१५.२१+३.३४८
गुरु−१६.४९९७+२.४२−१.३७५
शुक्र−५८.८८८१+२३.९१−४.९०७
शनि+१०६.३३८६−३८.९६+८.८६२
राहु+३१.७७६२+९.६३+२.६४८

चन्द्र आवर्ती फल आयाम = −१.१२७५° · sin(२D − M)। युग्म (बीज, क्षेपक) १८००–२११० में स्थानीय फिट है; अकेले बीज-भ्रमण को नया सिद्धान्त-N न समझें।

लोक-मान: शनि −०.७५° / १००० वर्ष, गुरु +०.३७°। यहाँ फिट-गति शनि +८.८६°, गुरु −१.३७° प्रति सहस्र वर्ष — क्षेपक के साथ। मकरन्द-प्रामाणिक नहीं।

२०२६ में सूर्य का रैखिक बीज +१२.१६२°; क्षेपक के साथ दृक्-शेष लगभग ०।

५. सीमाएँ

बुध-शुक्र का शीघ्रफल रैखिक अवशेष बिगाड़ता है। चन्द्र द्वितीय फल के बाद RMS ~०.२४° (अधिकतम ~०.७°)। बुध S+2S के बाद RMS ~१.९°; अधःसंयोग पर ~५°। शुक्र पर यह फल नहीं। उदय-लग्न चरदल से — यह देशान्तर-पत्र नहीं। NASA/JPL नहीं।

६. तुलना — मूल, बेञ्जवाल-दृग्बीज, दृक्

उज्जयिनी १५ अगस्त १२:०० IST। अन्तर अंशों में।

वर्षग्रहमूल स्फुटदृग्बीजदृक्दृक्−मूलदृक्−शोधित
१८००सूर्य१२०.९७°१२१.०४°१२१.०४°−०.०७−०.००
१८००चन्द्र६२.१७°६१.५०°६१.७८°+०.३९−०.२८
१८००मङ्गल१५.४७°१७.३१°१९.८३°−४.३७−२.५२
१८००बुध१२९.२७°१३२.४३°१३७.०८°−७.८०−४.६५
१८००गुरु९४.२६°९०.६२°९०.७५°+३.५२−०.१२
१८००शुक्र१२६.८६°१२६.८३°१२३.७९°+३.०७+३.०५
१८००शनि११२.१६°११६.५१°११४.७९°−२.६३+१.७२
१८००राहु३.५४°०.१९°०.१९°+३.३५−०.००
१९००सूर्य११९.१७°११९.४७°११९.४८°−०.३१−०.०१
१९००चन्द्र३५७.२५°३५९.९५°०.४०°−३.१५−०.४५
१९००मङ्गल७०.०७°७१.०८°७०.९८°−०.९०+०.११
१९००बुध१०३.४१°१०३.२६°१०२.१३°+१.२८+१.१३
१९००गुरु२२३.२१°२१८.७८°२१८.७६°+४.४५+०.०२
१९००शुक्र७५.४२°७६.००°७९.४९°−४.०७−३.४९
१९००शनि२३९.८९°२४४.८४°२४६.८१°−६.९२−१.९७
१९००राहु२२८.३३°२२४.७१°२२४.७१°+३.६२+०.००
२०००सूर्य११८.३३°११८.८६°११८.८७°−०.५४−०.०१
२०००चन्द्र२९९.६३°२९९.३२°२९९.४६°+०.१७−०.१४
२०००मङ्गल१०४.६५°१०५.६८°१०५.३२°−०.६७+०.३७
२०००बुध११३.३६°१११.५९°१११.७२°+१.६५−०.१३
२०००गुरु४८.७८°४४.२०°४४.२४°+४.५४−०.०४
२०००शुक्र१३९.७१°१३९.५८°१३६.६५°+३.०६+२.९३
२०००शनि३०.४९°३७.५०°३६.२४°−५.७५+१.२५
२०००राहु९३.०६°८९.१७°८९.१७°+३.८८+०.००
२०२६सूर्य११७.६४°११८.२२°११८.२४°−०.६१−०.०२
२०२६चन्द्र१४९.८५°१५१.५६°१५१.३६°−१.५१+०.२०
२०२६मङ्गल६६.८७°६८.१२°६८.३६°−१.४९−०.२४
२०२६बुध१०८.३५°१०६.५३°१०५.५५°+२.८०+०.९९
२०२६गुरु१०९.५२°१०५.८५°१०५.९०°+३.६२−०.०५
२०२६शुक्र१६२.९४°१६३.८८°१६४.१२°−१.१८−०.२३
२०२६शनि३४२.२२°३४९.५४°३५०.०६°−७.८४−०.५२
२०२६राहु३०९.९१°३०५.९६°३०५.९६°+३.९५+०.००
२१००सूर्य११६.५४°११७.२९°११७.३२°−०.७८−०.०२
२१००चन्द्र२३८.४२°२३९.३४°२३९.६९°−१.२७−०.३४
२१००मङ्गल१३४.८९°१३६.०८°१३६.०३°−१.१४+०.०६
२१००बुध१२९.८६°१२९.०६°१३१.१५°−१.२९−२.०९
२१००गुरु१७७.९३°१७४.०८°१७४.००°+३.९३+०.०८
२१००शुक्र७५.१५°७५.२९°७३.३२°+१.८३+१.९७
२१००शनि१७०.९७°१७७.३४°१७६.७०°−५.७३+०.६४
२१००राहु३१७.८४°३१३.६९°३१३.६९°+४.१४−०.००

७. दोनों पत्र

मूल सारणी · बेञ्जवाल-दृग्बीज · दृक्तुलना · तुलना · संस्कृत: शोधपत्रम्